Wednesday, 7 August 2013

काश ज़िन्दगी ::

काश ज़िन्दगी एक खुली किताब होती
जिसे मैं पढ़ पाती 
जब जी चाहे उसे उलट पाती
काश मै वो बीते पल में लौट पाती

काश ज़िन्दगी एक कागज़ होती
जिसके लफ़्ज़ों को खुद से लिख पाती
हर अच्छी यादें उसमे समेट पाती
हर बुरे पल को मिटा पाती

काश ज़िन्दगी एक बहता पानी होता
जहाँ चाहती उसे समेट पाती
जिस रूप में चाहती ढल पाती
पानी की बूंदों की तरह इसे हाथों में समेट पाती




 

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