Friday, 2 August 2013

खुश हूँ मैं.....


 

किसी ने पुछा के क्या खुश हूँ मैं
इन सवालों का जवाब धुंडती रही क्या खुश हूँ मैं
सारी रात इस उधेर बुन में रह गई, आखिर खुशियाँ क्या होती हैं
कभी तो दिल ने कहा नहीं के खुश हूँ मैं
ख्वाब का सच होना शायद खुशियों का सही माईने होता है
लेकिन क्या अधूरे ख्वाब लेकर खुश हूँ मैं
जो दुनिया देखती हैं ऐसा सच में तो नहीं होता
लेकिन अगर इसे खुशियाँ कहते हैं तो शायद खुश हूँ मैं !!







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