एक साथी ऐसा होता जो मेरी तनहाइयों से मुझे दूर ले जाता
जो मेरे परेशानियों और दर्द को अपना दर्द समझाता
मैं जब मायूस होती तो मुझे अपनी अल्हडपनियों से हँसता
मैं जब नाराज़ होती तो मुझे अपनी मासुमिअत से मुझे मनाता
ज़मीं पे होकर मेरे क़दम आसमान पे होते
अश्कें आखों में आने को तरसते
बस खुशियों की बारात होती और मैं होती
बेवजह की शिकवे शिकायतों की कोई जगह ना होती
काश ऐसा कोई इन्सान होता काश कोई ऐसी दुनिया होती
जहाँ मेरे क़दम होते और खुशियों की बरसात होती
काश ऐसी बारिशों की कोई सौगात होती
No comments:
Post a Comment