Thursday, 1 August 2013

!! दो लफ्ज़ !!

इस दिल को अब और दर्द सहन नहीं होता
खुशियाँ न सही, अब तो ग़म की बारिश न कर
थक गए हैं ये क़दम, सहम गया है ये दिल
अब और यूँ मेरे रब यूँ मुझपे ज़ुल्म न कर !!







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