इस दिल को अब और दर्द सहन नहीं होता
खुशियाँ न सही, अब तो ग़म की बारिश न कर
थक गए हैं ये क़दम, सहम गया है ये दिल
अब और यूँ मेरे रब यूँ मुझपे ज़ुल्म न कर !!
खुशियाँ न सही, अब तो ग़म की बारिश न कर
थक गए हैं ये क़दम, सहम गया है ये दिल
अब और यूँ मेरे रब यूँ मुझपे ज़ुल्म न कर !!
No comments:
Post a Comment