आज फिर दिल खुश होना चाहता है
एक अँधेरे से रौशनी की और बढ़ना चाहता है
बहुत थक गई थी, कदम रुक गए थे
अब इन सब से आगे निकलने को जी चाहता है
काफी हो गई हैरान और परेशां
आज फिर हर खुशियों में खुश होने को जी चाहता है
फिर कोई नई बात कोई नई आगाज़ दिल चाहता है
एक अँधेरे से रौशनी की और बढ़ना चाहता है
बहुत थक गई थी, कदम रुक गए थे
अब इन सब से आगे निकलने को जी चाहता है
काफी हो गई हैरान और परेशां
आज फिर हर खुशियों में खुश होने को जी चाहता है
फिर कोई नई बात कोई नई आगाज़ दिल चाहता है
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